आप सभी भक्त लोग हमारी कुलदेवी मैया सिद्धिदात्री जी के विशाल हवन व भव्य देवी जागरण मे दिनाँक 19 मई 2026 दिन मंगलवार को मैया सिद्धिदात्री मंदिर चाँदा महमदपुर ब्लॉक हरपालपुर जनपद हरदोई उ0प्र0मे सादर आमंत्रित है।माँ के हवन व जगराते मे पहुँच कर मैया का आशीर्वाद व प्रसाद अवश्य ग्रहण करें संपर्क सूत्र:- श्यामेन्द्र दुबे(नीरज) :-7007841936
यह पंडित रामचरण दुबे जी के परिवार की वंशावली (Family Tree) है। यहाँ इस चार्ट का संक्षिप्त विवरण दिया गया है: पारिवारिक परिचय गोत्र: उपमन्यु आस्पद: घरबास के दुबे (20 विश्वा) आसामी:घनश्याम कुलदेवी:सिद्धिदात्री देवी कुलदेवता :भगवान शिव मूल स्थान: बभनियावां / दुबियाना मोहल्ला, इटावा वर्तमान निवास: महमदपुर, पोस्ट-चाँदापुर, हरदोई (उत्तर प्रदेश) पीढ़ियों का विवरण प्रथम पीढ़ी: पंडित रामचरण दुबे (परिवार के मुखिया)। द्वितीय पीढ़ी: इनके तीन पुत्र थे— पंडित देवीदयाल दुबे, रामेश्वर दुबे (एक पुत्री), और बटेश्वर दुबे (कोई संतान नहीं)। तृतीय पीढ़ी: पंडित देवीदयाल दुबे के पुत्र पंडित रामशंकर दुबे 'लीडर'। चतुर्थ पीढ़ी: पंडित रामशंकर दुबे के तीन पुत्र— जवाहर लाल दुबे, हीरालाल दुबे (अविवाहित), और चंद्रप्रकाश दुबे। पाँचवीं पीढ़ी: जवाहर लाल जी के पुत्र: धनीराम और आत्माराम (अविवाहित)। चंद्रप्रकाश जी के पुत्र: रवीन्द्र, अरविन्द और श्यामेन्द्र। छठी पीढ़ी: धनीराम जी के पुत्र: अनिल और अनूप दुबे। रवीन्द्र जी के पुत्...
*प0 रामशंकर दुबे(लीडर)* *क्रांतिकारी महान स्वतंत्रता* *सेनानी का संक्षिप्त* *जीवन परिचय* प0 रामशंकर दुबे का जन्म कटियारी क्षेत्र जनपद हरदोई के चाँदा महमदपुर गॉव में 19 मई 1896 ईसवी को प0 देवीदयाल दुबे के घर मे हुआ था,इनकी माता का नाम श्रीमती विद्यादेवी था। बताते हैं कि प0 रामशंकर दुबे के बाबा प0 रामचरन दुबे अँग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध1860 में ही बिगुल फूँक चुके थे जो मूलतः इटावा जनपद के यमुना घाट के समीप दुबियाना मोहल्ले के रहने बाले थे और मात्र 24 वर्ष की अवस्था मे अँग्रेज अधिकारियों के कत्ल के इल्जाम के चलते फरारी काटते हुए राजा हरिदेव बख्श सिंह(जिनके नाम से हरदोई जनपद का नाम पड़ा)के यहाँ खैरुद्दीनपुर स्टेट में शरण लिए और चाँदा महमदपुर के वाशिंदा हो गए,प0 रामचरन के तीन पुत्र देवीदयाल, बटेश्वर व रामेश्वर हुए,प0 देवीदयाल के पुत्र रामशंकर हुए,बटेश्वर व रामेश्वर की जवान सन्तानो की मृत्यु हो गई,तीन भाइयों की संतानों के बीच प0 राम शंकर दुबे अकेले ही थे,बचपन से ही उनमें देश भक्ति का जज्बा कूट कूट कर भरा हुआ था,वचपन से ही वह निर्भीक व साहसी थे तथा नेतृत्त्व क्षमता से परि...
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