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कुलदेवी मैया सिद्धिदात्री जी चाँदा महमदपुर जिला हरदोई बाली

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 मैया सिद्धिदात्री जी मन्दिर चाँदा महमदपुर, हरदोई उ0प्र0 ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ मैया सिद्धिदात्री जी का यह पावन स्थान उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के चांदा महमदपुर क्षेत्र में स्थित है। यह स्थानीय स्तर पर माँ दुर्गा के नौवें स्वरूप, माता सिद्धिदात्री को समर्पित एक अत्यंत श्रद्धेय और पवित्र धार्मिक स्थल है। इस मंदिर और माता के स्वरूप से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ नीचे दी गई हैं: स्थान और महत्व:- ~~~~~~~~~ चाँदा महमदपुर (हरदोई):  यह मंदिर हरदोई जिले के ग्रामीण अंचल चांदा महमदपुर में स्थित है, जहाँ नवरात्रि के समय विशेष रूप से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. सिद्धियों की दात्री: माँ सिद्धिदात्री सभी प्रकार की सिद्धियों और सुख-समृद्धि को प्रदान करने वाली देवी मानी जाती हैं। स्थानीय निवासियों के लिए यह मंदिर गहरी आस्था और मन्नतें पूरी होने का मुख्य केंद्र है।  माँ सिद्धिदात्री का स्वरूप और मान्यता दिव्य स्वरूप: माँ सिद्धिदात्री कमल के फूल पर विराजमान रहती हैं। इनके चार हाथ हैं जिनमें वे चक्र, गदा, शंख और कमल का फूल धारण करती हैं। धार...
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 सिमरिया मेला काण्ड हरदोई(मिनी जलियाबाला काण्ड) सेमरिया कांड:- उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में घटित ब्रिटिश हुकूमत की क्रूरता का एक ऐसा काला अध्याय है, जिसे 'उत्तर प्रदेश का मिनी जलियांवाला बाग हत्याकांड' कहा जाता है। यह ऐतिहासिक और दर्दनाक घटना 26 जनवरी 1932 को हरदोई के सवायजपुर (तत्कालीन सांडी) क्षेत्र के सेमरिया गांव में हुई थी, जहां स्वतंत्रता की अलख जगा रहे निहत्थे देशभक्तों पर अंग्रेजों ने अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं।घटना की पृष्ठभूमि (Background)भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस द्वारा लाहौर अधिवेशन में पारित 'पूर्ण स्वराज' के प्रस्ताव के तहत, 26 जनवरी 1932 को पूरे देश में स्वतंत्रता की मांग की वर्षगांठ मनाई जा रही थी। इसी सिलसिले में हरदोई के क्रांतिकारियों ने भी जगह-जगह जुलूस और सभाएं आयोजित करने की योजना बनाई।मेले का अवसर: उन दिनों सेमरिया गांव में एक बहुत बड़ा वार्षिक पशु मेला लगा हुआ था, जिसमें दूर-दूर के क्षेत्रों से हजारों किसान और व्यापारी जुटे थे। क्रांतिकारियों का आगमन: स्वतंत्रता सेनानी प0रामशंकर दुबे(लीडर), ठाकुर विशेश्वरसिंह लम्बरदार व महेश्वर नाथ शाहाबादी (गु...

कुलदेवी मैया सिद्धिदात्री जी चाँदा महमद पुर बाली

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 आप सभी भक्त लोग हमारी कुलदेवी मैया सिद्धिदात्री जी के विशाल हवन व भव्य देवी जागरण मे दिनाँक 19 मई 2026  दिन मंगलवार को मैया सिद्धिदात्री मंदिर चाँदा महमदपुर ब्लॉक हरपालपुर जनपद हरदोई उ0प्र0मे सादर आमंत्रित है।माँ के हवन व जगराते मे पहुँच कर मैया का आशीर्वाद व प्रसाद अवश्य ग्रहण करें  संपर्क सूत्र:- श्यामेन्द्र दुबे(नीरज) :-7007841936 

क्रन्तिकारी प0रामशंकर दुबे (लीडर )

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  क्रांतिकारी पंडित रामशंकर दुबे , जिन्हें प्यार से   'लीडर'   कहा जाता था, उत्तर प्रदेश के हरदोई जनपद के हरपालपुर ब्लॉक के चाँदा महमदपुर गॉव के निवासी एक प्रमुख   स्वतंत्रता सेनानी   थे [1.1]। जिनके दादा प0रामचरण दुबे गऊघाट दुबियाना मोहल्ला इटावा के रहने बाले थे, जो एक अंग्रेज अधिकारी की हत्या कर फरारी के चलते हरदोई जनपद के खैरुद्दीनपुर स्टेट के तत्कालीन राजा हरिदेव बक्श सिंह के यहाँ शरण लिए और चाँदा महमदपुर गॉव के वाशिंदा हो गए, प0रामचरण दुबे के ज्येष्ठ पुत्र प0देवीदयाल दुबे के पुत्र  प0रामशंकर दुबे थे जो लीडर उपनाम से प्रसिद्ध हुए, उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में, विशेषकर   हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन  (HSRA)   के तहत, ब्रिटिश शासन के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभाई [1.1]। उनका योगदान मुख्य रूप से   काकोरी कांड  (1925)   और उससे जुड़ी क्रांतिकारी गतिविधियों में रहा [1.1]। पंडित रामशंकर दुबे 'लीडर' के बारे में मुख्य बातें: उपनाम 'लीडर':  उन्हें 'लीडर' के नाम से जाना जाता था, जो उनकी नेतृत्व क्षमता को दर्शाता ...

प0मायाराम दुबे घटिया दुबियान(गऊ घाट दुबियाना )इटावा आस्पद घरवास के दुबे वीस विश्वा घनश्याम आसामी वंशावली

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 प0मायाराम दुबे घटिया दुबियान(गऊ घाट दुबियाना )इटावा आस्पद घरवास के दुबे वीस विश्वा घनश्याम आसामी वंशावली 

प0रामचरण दुबे क्रन्तिकारी उपमंन्यु गौत्र आस्पद घरवास के दुबे, आसामी घनश्याम(इटावा-हरदोई )वंशावली

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क्रन्तिकारी स्वतंत्रता सेनानी प0 रामशंकर दुबे(लीडर)का जीवन परिचय

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 *प0 रामशंकर दुबे(लीडर)*  *क्रांतिकारी महान स्वतंत्रता* *सेनानी का संक्षिप्त*  *जीवन परिचय* प0 रामशंकर दुबे का जन्म कटियारी क्षेत्र जनपद हरदोई के चाँदा महमदपुर गॉव में 19 मई 1896 ईसवी को प0 देवीदयाल दुबे के घर मे हुआ था,इनकी माता का नाम श्रीमती विद्यादेवी था। बताते हैं कि प0 रामशंकर दुबे के बाबा प0 रामचरन दुबे  अँग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध1860 में ही बिगुल फूँक चुके थे जो मूलतः इटावा जनपद के यमुना घाट के समीप दुबियाना मोहल्ले के रहने बाले थे और मात्र 24 वर्ष की अवस्था मे अँग्रेज अधिकारियों के कत्ल के इल्जाम के चलते फरारी काटते हुए राजा हरिदेव बख्श सिंह(जिनके नाम से हरदोई जनपद का नाम पड़ा)के यहाँ खैरुद्दीनपुर स्टेट में शरण लिए और चाँदा महमदपुर के वाशिंदा हो गए,प0 रामचरन के तीन पुत्र देवीदयाल, बटेश्वर व रामेश्वर हुए,प0 देवीदयाल के पुत्र रामशंकर हुए,बटेश्वर व रामेश्वर की जवान सन्तानो की मृत्यु हो गई,तीन भाइयों की संतानों के बीच प0 राम शंकर दुबे अकेले ही थे,बचपन से ही उनमें देश भक्ति का जज्बा कूट कूट कर भरा हुआ था,वचपन से ही वह निर्भीक व साहसी थे तथा नेतृत्त्व क्षमता से परि...
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  यह  पंडित रामचरण दुबे जी   के परिवार की   वंशावली   (Family Tree) है। यहाँ इस चार्ट का संक्षिप्त विवरण दिया गया है: पारिवारिक परिचय गोत्र:  उपमन्यु आस्पद:  घरबास के दुबे (20 विश्वा) आसामी:घनश्याम  कुलदेवी:सिद्धिदात्री देवी  कुलदेवता :भगवान शिव  मूल स्थान:  बभनियावां / दुबियाना मोहल्ला, इटावा वर्तमान निवास:  महमदपुर, पोस्ट-चाँदापुर, हरदोई (उत्तर प्रदेश) पीढ़ियों का विवरण प्रथम पीढ़ी:  पंडित रामचरण दुबे (परिवार के मुखिया)। द्वितीय पीढ़ी:  इनके तीन पुत्र थे— पंडित देवीदयाल दुबे, रामेश्वर दुबे (एक पुत्री), और बटेश्वर दुबे (कोई संतान नहीं)। तृतीय पीढ़ी:  पंडित देवीदयाल दुबे के पुत्र पंडित रामशंकर दुबे 'लीडर'। चतुर्थ पीढ़ी:  पंडित रामशंकर दुबे के तीन पुत्र— जवाहर लाल दुबे, हीरालाल दुबे (अविवाहित), और चंद्रप्रकाश दुबे। पाँचवीं पीढ़ी: जवाहर लाल जी के पुत्र: धनीराम और आत्माराम (अविवाहित)। चंद्रप्रकाश जी के पुत्र: रवीन्द्र, अरविन्द और श्यामेन्द्र। छठी पीढ़ी: धनीराम जी के पुत्र: अनिल और अनूप दुबे। रवीन्द्र जी के पुत्...

घरवास के दुबे(इटावा)

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 इटावा में गऊघाट, दुबियाना (जिसे कभी-कभी घटिया दुबियाना भी लिखा जाता है) एक प्रमुख ऐतिहासिक और आवासीय क्षेत्र है। पं. रामचरण दुबे का नाम इस मोहल्ले के संदर्भ में एक प्रतिष्ठित व्यक्ति या परिवार के पूर्वज के रूप में लिया जाता है। यह मोहल्ला इटावा के पुराने शहर के क्षेत्र में स्थित है। गऊघाट क्षेत्र यमुना नदी के तट के पास होने के कारण धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। ऐतिहासिक संदर्भ: दुबियाना मोहल्ला मुख्य रूप से 'दुबे' उपनाम वाले ब्राह्मण परिवारों के निवास के लिए जाना जाता रहा है। पं. रामचरण दुबे इस क्षेत्र के एक जाने-माने व्यक्ति थे सन 1860 के आसपास की यह घटना 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (गदर) के ठीक बाद के दौर की है। उस समय इटावा और उसके आसपास के क्षेत्रों (जैसे घटिया दुबियाना और गऊघाट) में कई स्थानीय संघर्ष और विद्रोह हुए थे। प0 रामचरण दुबे और उनके परिवार के बारे में ऐतिहासिक अभिलेखों (जैसे इटावा गजेटियर) और स्थानीय इतिहास के आधार पर जानकारी इस प्रकार है: परिवार का विवरण: पिता: पं. रामचरण दुबे के पिता का नाम पं. मय्या राम दुबे (या कहीं-कहीं मैया राम) था। व...