क्रन्तिकारी प0रामशंकर दुबे (लीडर )
क्रांतिकारी पंडित रामशंकर दुबे, जिन्हें प्यार से 'लीडर' कहा जाता था, उत्तर प्रदेश के हरदोई जनपद के हरपालपुर ब्लॉक के चाँदा महमदपुर गॉव के निवासी एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी थे [1.1]। जिनके दादा प0रामचरण दुबे गऊघाट दुबियाना मोहल्ला इटावा के रहने बाले थे, जो एक अंग्रेज अधिकारी की हत्या कर फरारी के चलते हरदोई जनपद के खैरुद्दीनपुर स्टेट के तत्कालीन राजा हरिदेव बक्श सिंह के यहाँ शरण लिए और चाँदा महमदपुर गॉव के वाशिंदा हो गए, प0रामचरण दुबे के ज्येष्ठ पुत्र प0देवीदयाल दुबे के पुत्र प0रामशंकर दुबे थे जो लीडर उपनाम से प्रसिद्ध हुए, उन्होंने
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में, विशेषकर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के तहत, ब्रिटिश शासन के खिलाफ सक्रिय भूमिका निभाई [1.1]। उनका योगदान मुख्य रूप से काकोरी कांड (1925) और उससे जुड़ी क्रांतिकारी गतिविधियों में रहा [1.1]।
पंडित रामशंकर दुबे 'लीडर' के बारे में मुख्य बातें:
- उपनाम 'लीडर': उन्हें 'लीडर' के नाम से जाना जाता था, जो उनकी नेतृत्व क्षमता को दर्शाता है [1.1]।
- क्रांतिकारी गतिविधियां: वे चंद्रशेखर आजाद, राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खान जैसे अन्य प्रमुख क्रांतिकारियों के करीबी सहयोगी थे [1.1]।
- काकोरी कांड: उन्होंने 9 अगस्त 1925 को काकोरी कांड में भाग लिया था, जो एक ऐतिहासिक ट्रेन डकैती थी, जिसका उद्देश्य क्रांतिकारी कार्यों के लिए धन जुटाना था [1.1]।
- अंजाम: इस घटना के बाद उन्हें ब्रिटिश सरकार द्वारा पकड़ लिया गया और उन्हें कठोर कारावास की सजा सुनाई गई [1.1]।
- शहादत: वे देश के लिए आजीवन संघर्ष करते रहे और उन्होंने अपना जीवन भारत की स्वतंत्रता के लिए समर्पित कर दिया [1.1]।
पंडित रामशंकर दुबे का नाम भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के गुमनाम नायकों में लिया जाता है, जिन्होंने निस्वार्थ भाव से अपना योगदान दिया [1.1]।

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