क्रन्तिकारी स्वतंत्रता सेनानी प0 रामशंकर दुबे(लीडर)का जीवन परिचय
*प0 रामशंकर दुबे(लीडर)*
*क्रांतिकारी महान स्वतंत्रता* *सेनानी का संक्षिप्त*
*जीवन परिचय*
प0 रामशंकर दुबे का जन्म कटियारी क्षेत्र जनपद हरदोई के चाँदा महमदपुर गॉव में 19 मई 1896 ईसवी को प0 देवीदयाल दुबे के घर मे हुआ था,इनकी माता का नाम श्रीमती विद्यादेवी था।
बताते हैं कि प0 रामशंकर दुबे के बाबा प0 रामचरन दुबे अँग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध1860 में ही बिगुल फूँक चुके थे जो मूलतः इटावा जनपद के यमुना घाट के समीप दुबियाना मोहल्ले के रहने बाले थे और मात्र 24 वर्ष की अवस्था मे अँग्रेज अधिकारियों के कत्ल के इल्जाम के चलते फरारी काटते हुए राजा हरिदेव बख्श सिंह(जिनके नाम से हरदोई जनपद का नाम पड़ा)के यहाँ खैरुद्दीनपुर स्टेट में शरण लिए और चाँदा महमदपुर के वाशिंदा हो गए,प0 रामचरन के तीन पुत्र देवीदयाल, बटेश्वर व रामेश्वर हुए,प0 देवीदयाल के पुत्र रामशंकर हुए,बटेश्वर व रामेश्वर की जवान सन्तानो की मृत्यु हो गई,तीन भाइयों की संतानों के बीच प0 राम शंकर दुबे अकेले ही थे,बचपन से ही उनमें देश भक्ति का जज्बा कूट कूट कर भरा हुआ था,वचपन से ही वह निर्भीक व साहसी थे तथा नेतृत्त्व क्षमता से परिपूर्ण थे,उनकी धर्मपत्नी का नाम श्रीमती रामरानी था।वह अपनी जवानी में कदम रखते ही अँग्रेजो के खिलाफ अपने साथियों सहित आवाज बुलंद करने लगे,वह 1922 में 4 वर्ष 1 माह के लिए अँग्रेजी हुकूमत के विरुद्ध आवाज उठाने के जुर्म में जेल गए,1926 में जेल से रिहा होने के बाद पुनः उन्ही गतिविधियों में लिप्त हो गए, सन 1932 में हरपालपुर के पास लगने बाले सिमरिया पशु मेले में क्रांतिकारियों ने एक जनसभा की जिसमे अँग्रेजो ने निहत्थों पर गोलियाँ चलवाई,जिसमे लगभग 300 लोग शहीद हुए व कुछ अँग्रेज अधिकारी भी मारे गए,अँग्रेजो ने इस जनसभा का नेतृत्वकर्ता प0रामशंकर दुबे,महेश्वर नाथ गुप्त और विशेश्वर सिंह लम्बरदार सहित 24 लोगो को जेल में भेज दिया,अँग्रेज अधिकारी प0रामशंकर दुबे को क्रांतिकारियों का लीडर मानते थे और उनको लीडर कह कर ही संबोधित करते थे,जिस बजह से उनको लोग लीडर नाम से भी जानने लगे,सिमरिया काण्ड में लगभग 5 वर्ष जेल में भीषड यातनाओं को सहने के बाद वह रिहा हुए,तदुपरान्त उनके हौसले और बुलन्द हो गए वह लगातार अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों में लिप्त रहे और सन 1942 में पुनः जेल यात्रा पर लगभग 2 साल के लिए उनको अनेक धाराओं में जाना पड़ा।इस तरह से कुल उन्होंने अपने जीवन के 10 वर्ष 9 माह 18 दिन जेल में व्यतीत किये और अंत मे 15 अगस्त सन 1947 को देश को आजादी दिला कर ही माने।प0 रामशंकर दुबे के तीन पुत्र क्रमशः जवाहरलाल, हीरालाल व चंद्रप्रकाश हुए व दो पुत्रीयाँ विटोली देवी व कपूरवती हुई।जवाहरलाल के दो पुत्र क्रमशःधनीराम व आत्माराम तथा चंद्रप्रकाश के तीन पुत्र क्रमशः रवींद्र,अरविंद व श्यामेन्द्र हुए,हीरालाल अविवाहित रहे।इस तरह सम्पूर्ण रूप से परिवार से फलीभूत होकर आजाद भारत मे लगभग 54 वर्ष अपना जीवन व्यतीत करने के उपरांत 105 वर्ष की अवस्था मे इस महान क्रांतिकारी ने 22 मई 2001 को अपने जीवन की अंतिम साँस ली।भारत माता के इस वीर सपूत की पूरे राजकीय सम्मान के साथ अन्येष्टि क्रिया सम्पन्न कराई गई।

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जवाब देंहटाएंJai hind
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जवाब देंहटाएंKrantikari pandit Ramashankar dubey(leader) amar rahen
जवाब देंहटाएंJai hind vandematram
Krantikari pandit Ramshankar dubey ji ko shat shat naman
जवाब देंहटाएंShat shat naman
जवाब देंहटाएंPandit ramashankar dubey leader Amar Rahe
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